बीड। महाराष्ट्र के बीड जिले में आज हो रही ओबीसी महा-एल्गार सभा से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री और ओबीसी नेता #छगनभुजबळ ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता #मनोजजरांगे पाटील पर जमकर तीखे हमले किए और उन्हें सीधा इशारा देते हुए कहा कि “इन लोगों को मेरा इतिहास मालूम नहीं है।”
भुजबळ ने जरांगे और उनके समर्थकों पर आरोप लगाया कि जहां-जहां उन्होंने उत्पात मचाया, वहीं-वहीं आज की यह OBCमहाएल्गारसभा हो रही है। उन्होंने विशेष रूप से बीड का जिक्र करते हुए कहा, “जिस बीड में जरांगे के लोगों ने धुडगूस घातला, विधायकों के घर जलाए, ओबीसी नेताओं पर हमले किए, वहीं आज यह महा-एल्गार मेळावा हो रहा है।”
“आरक्षण को नहीं लगने देंगे धक्का”
छगनभुजबळ ने पिछले साल सितंबर से चल रहे #मराठा_आरक्षण आंदोलन के दौरान #OBCआरक्षण को लेकर पैदा हुई आशंकाओं और आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने ओबीसी समुदाय को आश्वासन दिया, “आरक्षण को किसी भी तरह का धक्का नहीं लगने देंगे, इसके लिए हम पूरी तरह से प्रयास करेंगे।”
“जरांगे को नहीं पता मेरा इतिहास”
भुजबळ ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए #मनोजजरांगे को चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “ये लोग मेरा इतिहास नहीं जानते। जब ये सब छोटे थे, तब मैंने शिवसेना में रहते हुए आंदोलन किए हैं। शिवसेना छोड़ने के बाद भी मैंने ऐसे कई अवसरों का सामना किया है।” इस बयान को जरांगे के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
सर्वदलीय एकजुटता का दावा, पर मतभेद भी
भुजबळ ने जरांगे द्वारा इस सभा को अजित पवार द्वारा प्रायोजित होने के आरोप को भी खारिज करते हुए कहा कि यह किसी एक पक्ष का नहीं, बल्कि एक सर्वदलीय मेला है। उन्होंने दावा किया कि धनंजय मुंडे, गोपीचंद पडळकर, लक्ष्मण हाके सहित राज्य के सभी बड़े ओबीसी नेता इस बीड महाएल्गार सभा में शामिल होंगे।
हालांकि, इस दावे के बीच कुछ बड़े नामों ने दूरी बना ली है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के इस सभा में शामिल नहीं होने की खबर है। वहीं, वरिष्ठ ओबीसी नेता बबनराव तायवाडे ने स्पष्ट किया कि भले ही उनके मतभेद हों, लेकिन मनभेद नहीं हैं, फिर भी वे इस मोर्चे में शामिल नहीं होंगे।
क्या है मुद्दा?
बीड में हो रही इस ओबीसी महा-एल्गार सभा की पृष्ठभूमि में मराठा_आरक्षण का मुद्दा है। मराठा आंदोलनकारी 2 सितंबर, 2025 के सरकारी संकल्प (जीआर) को रद्द करने की मुख्य मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ओबीसी नेता इस जीआर के रद्द होने से अपने आरक्षणविवाद को खतरे में देख रहे हैं और इसी आशंका के चलते यह विशाल सभा बुलाई गई है। माना जा रहा है कि आज की सभा के बाद महाराष्ट्रराजनीति में नया तनाव पैदा हो सकता है।


