Wednesday, May 27, 2026
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अमेरिका में गजाला हाशमी ने रचा इतिहास: वर्जीनिया की पहली मुस्लिम भारतीय मूल की लेफ्टिनेंट गवर्नर चुनी गईं

भारत के हैदराबाद में जन्मी गजाला हाशमी ने वर्जीनिया में लेफ्टिनेंट गवर्नर का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिका के किसी राज्य में इस पद पर चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम महिला बन गई हैं।

अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में न्यूयॉर्क में भारतवंशी जोहरान ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद अब वर्जीनिया से एक और बड़ी खबर सामने आई है। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता गजाला हाशमी ने वर्जीनिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी भी राज्य में इस पद पर चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम महिला बन गई हैं। उनकी यह जीत डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।

CNN के मुताबिक, गजाला हाशमी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन रीड को कड़े मुकाबले में 52.4% वोट हासिल कर हराया। जॉन रीड इस राज्य के पहले खुले तौर पर समलैंगिक उम्मीदवार भी थे। इस जीत के साथ हाशमी अब वर्जीनिया सीनेट की अध्यक्षता करेंगी और जरूरत पड़ने पर सदन में बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत डालने की शक्ति भी उनके पास होगी। हालांकि, उनकी सीट खाली होने के बाद सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत 20-19 पर आ जाएगा, इसलिए आने वाले समय में राजनीतिक संतुलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

गजाला हाशमी की राजनीतिक यात्रा 2019 में सुर्खियों में आई थी, जब उन्होंने वर्जीनिया राज्य सीनेट चुनाव जीतकर वर्जीनिया की पहली मुस्लिम और पहली भारतीय मूल की सीनेटर बनने का गौरव हासिल किया था। उन्होंने उस समय अपने अभियान में ट्रंप प्रशासन द्वारा लाए गए मुस्लिम बैन का मुखर विरोध किया था। हाशमी ने शिक्षा के अधिकार, महिला सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय को अपने राजनीतिक एजेंडे में सबसे प्रमुख स्थान दिया है।

भारत से गहरा रिश्ता
गजाला हाशमी का जन्म 5 जुलाई 1964 को हैदराबाद में हुआ था। जब वह केवल चार वर्ष की थीं, तब वे अपनी मां और भाई के साथ अमेरिका चली गईं। उनके पिता उस समय जॉर्जिया में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत थे। अमेरिका पहुंचने के बाद हाशमी ने उच्च शिक्षा में अपना ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने जॉर्जिया साउदर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ ग्रेजुएशन किया और फिर एमोरी यूनिवर्सिटी से अमेरिकन लिटरेचर में पीएचडी की।

अपने चुनावी अभियान में हाशमी ने लगातार ट्रंप प्रशासन की नीतियों का विरोध किया और महिलाओं, शिक्षकों तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। दूसरी ओर, उनके प्रतिद्वंदी जॉन रीड ने पैरेंट्स राइट्स और ट्रांसजेंडर नीतियों को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन उन्हें ट्रंप का औपचारिक समर्थन नहीं मिला।

गजाला हाशमी की जीत न केवल अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती पहचान और प्रभाव का प्रमाण है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि अमेरिकी मतदाता अब विविधता और समावेश को अधिक महत्व देने लगे हैं। उनका यह ऐतिहासिक कदम दुनिया भर में भारतीय समुदाय के लिए गर्व का क्षण है।

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