मुंबई महापालिका और अन्य स्थानिक स्वराज्य संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भाई जगताप ने महाविकास आघाड़ी को झटका देने वाली भूमिका निभाई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस को आगामी चुनावों में स्वबळावर लढना चाहिए।
भाई जगताप का कहना है कि “मुझे आश्चर्य होता है कि मेरे तीन साल मुंबई अध्यक्ष रहने के दौरान मेरा यही स्टैंड था और आज भी यही है। यह मेरा निजी मत नहीं है, बल्कि मुंबई में हमारे सभी नेताओं का यही दृष्टिकोण है। हमारी पार्टी को आगामी महापालिका और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों में स्वबळावर लढना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया कार्यकर्ताओं के जीवन से जुड़ी हुई है। कार्यकर्ता अपने वार्ड, जिला और पंचायत समिति में पार्टी का झंडा लेकर सक्रिय रहते हैं। ऐसे कार्यकर्ताओं को यह उम्मीद होती है कि उन्हें नगरपालिका, महानगरपालिका और जिला परिषद की चुनावी लड़ाई में संपूर्ण मौका मिले। यही कारण है कि उन्होंने स्वबळावर लढने की मांग की।
भाई जगताप ने बताया कि पिछले सप्ताह मुंबई कांग्रेस की पॉलिटिक अफेयर कमिटी की बैठक आयोजित हुई, जिसमें महाराष्ट्र के जनरल सेक्रेटरी इनचार्ज रमेश चेन्नीथला भी मौजूद थे। इस बैठक के दौरान जब उनसे राय मांगी गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मुंबई महापालिका, जिला परिषद और अन्य स्थानीय संस्थाओं के चुनाव स्वबळावर लढाए जाने चाहिए। उनके अनुसार पॉलिटिक अफेयर कमिटी के अधिकांश सदस्यों ने भी यही राय व्यक्त की।
भाई जगताप ने यह भी साफ किया कि उनका यह मत व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि “पक्ष की अंतिम रणनीति और गठबंधन संबंधी निर्णय हमेशा हाईकमान द्वारा लिया जाता है। मैंने अपना मत केवल साझा किया। पार्टी की भूमिका तय करना पार्टी प्रमुखों का अधिकार है। अध्यक्ष रहते हुए मेरी भूमिका और अब, जब वर्षा गायकवाड अध्यक्ष हैं, में कोई अंतर नहीं आया। चुनाव में किसके साथ गठबंधन करना है, किसके साथ नहीं, यह पार्टी का निर्णय होता है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाई जगताप का यह कदम महाविकास आघाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। स्वबळावर चुनाव लड़ने का निर्णय कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सक्रियता को भी बढ़ाएगा। आगामी BMC चुनाव 2025 में मुंबई कांग्रेस की रणनीति, गठबंधन और स्वबळावर चुनाव की दिशा राज्य की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
इस घटना के बाद स्पष्ट है कि मुंबई महापालिका चुनाव केवल महाविकास आघाड़ी और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि कांग्रेस के स्वबळावर रणनीति की दिशा तय करने वाले कदमों के कारण भी राज्य की राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।


