Wednesday, May 27, 2026
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गडचिरोली लोकल बॉडी चुनाव: अजित पवार की पार्टी ने दिया महायुती को झटका, विधायक धर्मराव आत्राम की बड़ी घोषणा

गडचिरोली में एनसीपी विधायक धर्मराव आत्राम का बड़ा बयान — अजित पवार की पार्टी अब महायुती से अलग होकर 51 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। भाजपा पर गंभीर आरोप भी लगाए।

गडचिरोली जिले में आगामी स्थानीय स्वराज संस्थाओं (लोकल बॉडी) के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक हलचलें तेज होती जा रही हैं। नेता अब अपनी सुविधा के अनुसार दल बदल करते नजर आ रहे हैं। वहीं, शीर्ष स्तर पर महायुती के घटक दलों के बीच गठबंधन (युती-आघाडी) को लेकर बैठकों का दौर जारी है। महायुती की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि “जहां संभव होगा, हम एकजुट होकर लड़ेंगे।”

लेकिन इसी बीच, चुनाव के ऐन मौके पर महा-युती को बड़ा झटका देने वाली घोषणा सामने आई है। अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक धर्मराव बाबा आत्राम ने चुनाव में स्वबळ (अपने दम पर) उतरने की घोषणा की है।

गडचिरोली में एनसीपी का भव्य कार्यकर्ता मेळावा

गडचिरोली के चामोर्शी में अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान अहेरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक धर्मराव आत्राम ने आगामी जिला परिषद चुनाव के प्रचार की औपचारिक शुरुआत की।

इस मौके पर विभिन्न दलों से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया। धर्मराव आत्राम ने घोषणा की कि अहेरी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले पाँच तालुकों की सभी जिला परिषद सीटों पर एनसीपी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

उन्होंने कहा कि —“जरूरत पड़ने पर कुछ जगहों पर मित्रवत (मैत्रीपूर्ण) लड़ाई हो सकती है, लेकिन यदि महायुती की ओर से प्रस्ताव नहीं आता तो एनसीपी 51 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।”

भाजपा पर गंभीर आरोप — ‘मेरे ही भतीजे को मेरे खिलाफ उतारा’

विधायक धर्मराव आत्राम ने इस कार्यक्रम के दौरान अपने सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उन्हें हराने की कोशिश की थी।

उन्होंने कहा कि राज्य में महायुती की सरकार होने के बावजूद भाजपा ने उनके खिलाफ अंदरखाने साजिश रची। इससे यह साफ है कि गठबंधन में अंदरूनी मतभेद अभी भी कायम हैं।

अब कौन करेगा गडचिरोली पर कब्जा?

आत्राम की इस घोषणा के बाद गडचिरोली जिले का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अगर अजित पवार गुट की एनसीपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला बरकरार रखा, तो भाजपा भी पूरी ताकत से मैदान में उतर सकती है।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि —
 क्या गडचिरोली में फिर नया गठबंधन बनेगा?
 या अजित पवार की एनसीपी स्वतंत्र लड़ाई जारी रखेगी?

इसके साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या एनसीपी अन्य जिलों में भी इसी तरह “स्वबळाचा निर्णय” यानी “अपने दम पर चुनाव लड़ने” का ऐलान करेगी?
राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस कदम का असर राज्य की आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों पर भी देखने को मिलेगा।

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