अकोला, 11 अक्टूबर – महाराष्ट्र के अकोला-अकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज रयत किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने जोरदार रस्ता रोको आंदोलन किया। सुबह लगभग 11 बजे चोहोट्टा बाजार परिसर में शुरू हुए इस आंदोलन में सैकड़ों किसान शामिल हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी प्रमुख मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
किसानों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र के सभी किसानों के लिए सर्वसमावेशी कर्जमाफी, ₹50,000 की आर्थिक सहायता, किसान पहचान (Farmer ID) की अनिवार्यता समाप्त करना, राज्य में दुष्काल (सूखा) घोषित करना, तथा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना शामिल हैं। किसानों ने C+50% के आधार पर MSP कानून लागू करने, बीज, खाद और कृषि सामग्री पर GST हटाने, और सभी कृषि सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी मांग रखी।
आंदोलन के दौरान किसान शांतिपूर्ण और सविनय रहे। जब मार्ग से एक एम्बुलेंस गुजरनी थी, तो आंदोलनकारियों ने तुरंत रास्ता खाली कर मानवता का परिचय दिया। पुलिस प्रशासन ने मौके पर कड़ा सुरक्षा बंदोबस्त किया और कई किसान नेताओं व युवा प्रतिनिधियों को एहतियातन हिरासत में लिया।
आंदोलन में प्रमुख किसान नेताओं पूर्णाजी खोडके (विदर्भ विभागीय युवा अध्यक्ष, रयत किसान संघ), दीपक इंगळे (पूर्व अध्यक्ष), सुगत भटकर (भारतीय किसान यूनियन जिल्हा अध्यक्ष) और मंगलाताई पुंडकर (प्रहार जनशक्ति पार्टी उपजिल्हाप्रमुख) की उपस्थिति रही।
मुख्य विवाद यह रहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की, लेकिन अकोला जिले के मुर्तीजापुर और अकोला तालुकों को इससे बाहर रखा गया। इसी को लेकर किसानों में तीव्र असंतोष है।
रयत किसान संघ के युवा अध्यक्ष पूर्णाजी खोडके ने मीडिया से कहा –
यह आंदोलन भले ही शांतिपूर्ण रहा, लेकिन किसानों का बढ़ता असंतोष सरकार के लिए चेतावनी है। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में विदर्भ क्षेत्र में किसान आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।


