मुंबई, 18 अक्टूबर (विशेष संवाददाता) – अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चमक लगातार बढ़ रही है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में सोने की कीमतें प्रति औंस 4,500 अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकती हैं। इस तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण हैं — केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की कमजोरी और एशियाई देशों से मजबूत मांग।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में अब तक सोने की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है और यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर चुकी है। इस दौरान सोने ने लगातार 35 नए उच्चतम स्तर दर्ज किए हैं, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत देते हैं।
तेजी के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में संभावित कटौती, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने के भंडार में वृद्धि ने इस तेजी को और बल दिया है।
मोतीलाल ओसवाल के कमोडिटी और करेंसी विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार, “सोने की मौजूदा तेजी डॉलर की कमजोरी और निवेशकों के सुरक्षित निवेश की प्रवृत्ति का परिणाम है।”
भारतीय बाजार में नई ऊँचाइयाँ
भारत में भी सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। पिछले सप्ताह सोना 1.20 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गया। रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो कीमतें दीर्घकाल में 1.35 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं। साथ ही, अमेरिकी डॉलर की दर लगभग 89 रुपये तक गिरने का अनुमान जताया गया है।
दूसरी ओर, चाँदी ने इस साल सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। अब तक चाँदी की कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है और घरेलू बाजार में यह 2.3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाँदी के दाम 75 डॉलर प्रति औंस तक बढ़ने की संभावना है।
औद्योगिक मांग से बढ़ी चाँदी की चमक
चाँदी की मांग केवल निवेश के कारण नहीं बढ़ी है, बल्कि औद्योगिक उपयोग ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और एआई हार्डवेयर निर्माण में चाँदी की बढ़ती खपत से बाजार में लगातार आपूर्ति की कमी बनी हुई है। सोना-चाँदी अनुपात 110 से घटकर अब लगभग 81-82 पर आ गया है, जो चाँदी की सापेक्ष मजबूती का संकेत देता है।
आपूर्ति में कमी और भारत की बढ़ती भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 की पहली तीन तिमाहियों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने लगभग 600 टन सोना खरीदा, जबकि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 450 टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई — यह 2020 के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है।
हालाँकि, स्थिर खनन उत्पादन और सख्त पर्यावरणीय नीतियों के कारण सोने और चाँदी की आपूर्ति सीमित हो गई है।
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, ने 2025 की तीसरी तिमाही में लगभग 300 टन सोना और 3,000 टन चाँदी आयात की। सांस्कृतिक परंपरा और बढ़ती आय के चलते भारतीय बाजार में इन धातुओं की मांग लगातार बनी हुई है।
वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के दौर में सोना और चाँदी दोनों ही निवेशकों के लिए सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बने हुए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में इन दोनों की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।


